World ka Sabse kurur Tanashah Idi Amin jo khata tha Insano ka Maans

Idi Amin

वर्ल्ड के इतिहास में आपने बहुत से तानाशाह के बारे में सुना होगा लेकिन आज मैं जिस तानाशाह के बारे में बताने जा रहा हूँ उसके बारे में सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। आपने बहुत से तानाशाह के नाम सुने होंगे मगर इस तानाशाह जैसा शायद ही इस दुनिया मे दोबारा पैदा हुआ हो, जल्लाद, कुरुर, नरभक्षी, पागलपन की हद से गुजरने वाले का नाम है Idi Amin.

यह दुनिया का इकलौता ऐसा तानाशाह था जिसने खुद को युगांडा का राष्ट्रपति घोषित किया और तो और इसके बारे में ये भी कहा गया है कि ये इंसानो का मांस तक खा जाता था। उसने दुनिया को एहसास कराया कि पागलपन की हद से गुजरना, कुरुरता, नरभक्षी किसे कहते हैं।

अगर आपमें भी वर्ल्ड के सबसे कुरुर तानशाह Idi Amin की जिंदगी के बारे में जानने की दिलचस्पी है तो इस पोस्ट को आखिरी तक जरूर पढ़ें। तो चलिए शुरू करते है

सत्ता में अपना स्थान बनाने के लिए रसोइया बना

ईदी अमीन का जन्म को लेकर मतभेद रहे है जिसकी वजह से इनके जन्म और स्थान का सटीक अनुमान नही लग पाया। परंतु कुछ लोगो का मानना था कि उनका जन्म 1925 में कोबोको या फिर कंपाला में हुआ था।

युगांडा के इस तानाशाह की जिंदगी पैदाईश से अच्छी नही थी और न ही इनके माता पिता कोई महाराजा या बड़े अफसर हो। बचपन मे Amin के पिता किसी कारणवश घर छोड़कर चले गये जिसकी वजह से घर में खाने पीने की दिक्कत होने लगी।

जैसे तैसे मां ने इनका लालन पोषण किया और हर एक मां की तरह इन्होंने भी अमीन को स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा परंतु पढ़ाई में ज्यादा रुचि न होने के अभाव में चौथी कक्षा के बाद अमीन ने स्कूल छोड़ दिया।

Idi Amin बचपन से ही गुस्से वाले स्वभाव का था इसलिए जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ती गई वैसे वैसे उसका गुस्सा के साथ साथ शरीर की लंबाई बढ़ती गयी. अपने भारी भरकम शरीर छह फीट चार इंच के साथ वह बॉक्सिंग में चला गया।

उसने करीब 9 वर्ष तक बॉक्सिंग की और काफी नाम भी कमाया जिसकी वजह से उसे ‘Light Heavyweight Champion’ अवार्ड से नवाजा गया।

Idi Amin के सपने दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे थे जिसकी वजह से उसने बॉक्सिंग को छोड़ कर सन 1946 में ‘किंग्स अफ्रीकी राइफल्स’ में सहायक रसोईये के रूप में प्रवेश लिया।

वह अपने काम की फुर्ती और आक्रामक होने की वजह से बहुत जल्द ही ब्रिटिश अधिकारियों की नजर में चढ़ने लगा और जिसके चलते मात्र 1 साल के अंदर ही उसका प्रोमशन कर दिया गया। ऐसा कहा जाता है कि सत्ता में बढ़ने का पहला कदम यही से शुरू हुवा था।

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किस्मत का धनी था यह तानाशाह ईदी अमीन

कहते हैं जब वक़्त आपके साथ होता है तो दुनिया आपके कदम चूमती है फिर चाहे वह सुख में हो या दुख में। दिन प्रतिदिन उपलब्धियों को हासिल करने के बाद मानो अमीन को पागल जैसा बना दिया हो। 1975 में सार्जेंट मेजर और लेफ्टिनेंट तक बनने के बावजूद वह यही तक नही रुका। जल्द ही उसे अपने ऊपर घमंड हो गया और कुरुरता का नंगा नाच करना उसने शुरू कर दिया।

1962 में अमीन के आदेश पर युगांडा के उत्तर दिशा में आदिवासियो पर बड़ा हमला किया जिसमें बहुत लोग मारे गए थे। जब ब्रिटिश अधिकारियों ने इसकी जांच की तो पता चला कि यह सब ईदी के आदेश पर हुआ है।

रिपोर्ट में पता चला कि आदिवासियों को पीट पीट कर मार डाला गया और कुछ को तो जिंदा जमीन के अंदर दफन कर दिया। ब्रिटिश अधिकारियों ने तुरंत ईदी अमीन का कोर्ट मार्शल करने का हुक्म दिया, लेकिन कहते है ना कि जब वक़्त साथ होता है तो मौत भी अपने कदम पीछे कर लेती हैं।

कोर्ट मार्शल होने से पहले युगांडा को 9 अक्टूबर में ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिल गयी। इसका फायदा ईदी को हुआ युगांडा के पूर्व प्रधानमंत्री ओबेट मिल्टन द्वारा जो भी आरोप लगे थे वह सब खारिज हो गये और युगांडा सेना में उसे वायुसेना के डिप्टी कमांडर बना दिया गया।

ओबेट का रास्ता साफ करने के बाद दिखाया कुरुरता का नंगा नाच

एक वक्त सब को लग रहा था कि ओबेट मिल्टन और ईदी एक दूसरे के बेहद करीब साथी है। लेकिन ईदी अमीन के मष्तिस्क में कुछ और ही चल रहा था वह अपनी हुकूमत चलाना चाह रहा था और ये ओबेट मिल्टन के न होने से ही संभव था। एक बार जब ओबेट को ईदी के षडयंत्र के बारे में भनक लगी तो वह ईदी से दूर होने लगा।

ओबेट ने ईदी को फसाना चाहा और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया किन्तु ईदी ने उल्टा ओबेट के ऊपर ही चाल चल दी उसने युगांडा के वासियो को अपने समर्थन में खड़ा कर लिया जिससे उसकी पावर बढ़ गयी और ओबेट कि गुप्त पुलिस को पकड़ के उसकी सत्ता खत्म कर दी।

Idi amin अब स्वतंत्र था और अपनी कुरुरता का दृश्य फैलाने का समय ला दिया था। सबसे पहले तो उसने ओबेट के पक्ष में जो सैनिक थे उन्हें मरवा डाला लगभग 9000 सैनिक की हत्यायों का कारण बना।

अपने 8 वर्ष के तानाशाही में उसने करीब 5,00,000 लोग को मार दिए। अमीन को एशियाइयों से बहुत चिढ़ थीं, उसने एक दिन कहा कि अल्लाह मेरे सपने में आये थे और उन्होंने ऐशियाई लोगो को युगांडा से निकालने का फरमान सुनाया है। उसने आदेश दिया कि जिनके ओएस युगांडा की नागरिकता नही है उन्हें 90 दिनों के अंदर देश छोड़कर जाना होगा।

खाता था इंसानो का मांस

युगांडा में ईदी के शासन काल मे रहे स्वास्थ्य मंत्री हेनरी केयम्बा ने अपनी बुक ‘A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin’ में उन्होंने अमीन की दरिंदगी बयां की है। उन्होंने लिखा कि एक बार अमीन मुर्दाघर गया हुआ था जहाँ पर उसके दुश्मनो के शव रखे हुए थे। उसने शवो के साथ क्या किया पता नही लेकिन कुछ युगांडावासियो का कहना है कि उसने अपने दुश्मन का खून पिया जैसा कि कांकवा जनजाति में प्रथा है।

बीबीसी के अनुसार Henry Kyemba ने अपनी बुक में एक और जिक्र का वर्णन किया है कि “कई बार राष्ट्रपति और दूसरे लोगो के सामने शेखी बघारी थी कि उन्होंने मानव गोश्त खाया है. मुझे याद है अगस्त 1975 में जब अमीन कुछ वरिष्ठ अधिकारियो को अपनी जाएर यात्रा के बारे में बता रहे थे तो उन्होंने कहा कि वहां उन्हें बंदर का गोश्त परोसा गया जो कि मानव के गोश्त से अच्छा नही था। लड़ाई के दौरान अक्सर ऐसा होता है कि आपका साथी सैनिक घायल हो जाता है ऐसे में उसको मार कर खा जाने से आप भुखमरी से बच सकते है।”

कहा जाता है कि Idi Amin के घर में एक बंद दरवाजा हुआ करता था जिसके अंदर किसी को भी जाने की अनुमति नही थी उसकी पत्नी को भी नही, उसके अंदर कभी कभार सफाई के लिए एक नौकर जाता था। एक बार उस रूम के अंदर रखे फ्रिज को खोला गया तो उसके अंदर मानव के कटे हुए सिर थे।

खूबसूरत लड़कियों का था शौक़ीन

ईदी खूबसूरत लड़कियों का बहुत शौकीन था उसके इतने अवैध संबंध थे कि गिनना भी मुश्किल है। कहा जाता है उसके पास 30 लड़कियों के हरम हुआ करते थे और जिस लड़की पर उसका दिल आ जाता था उसके साथ सोने की इच्छा और बाद में मरवा दिया करता था।

अमीन ने अपनी प्रेमिका के प्रेमी को सिर कटवाकर मार दिया था और इस तरह अनेक महिलाये थी जिनके प्रेमियों की हत्या सिर कटवाकर की थी।

Idi Amin ने कम से कम 6 महिलाओ से शादी की थी, जिसमे से उसने 3 को तलाक दे दिया था और करीब 35 से 45 उसके बच्चे थे।

ईदी अमीन का दर्दनाक अंत

वक़्त सभी का एक जैसा नही होता है सभी का अंत निश्चित है। ऐसा ही ईदी के साथ भी हुआ, उम्र के साथ उसके दोस्तों की संख्या कम होने लगी और जिस तरह से उसने सत्ते को हासिल किया था उसी प्रकार से उसे भी सत्ते से हटाया गया।

सत्ते से हटाए जाने के बाद उसे युगांडा से बाहर भागना पड़ा और सउदी अरब में उसने शरण ली करीब 10 वर्ष तक वह वही रहा, फिर उसे वापस युगांडा आने की सूझी और वह वापस युगांडा आया लेकिन पहचान में आ जाने कारण वह वापस जैसे तैसे वापस सऊदी पहुंच गया जैसे जैसे उम्र बढ़ती गयी उसका शरीर उसका साथ छोड़ने लगा गुर्दे में कमी के आ जाने से वह कोमा में चला गया और 16 अगस्त 2003 को उसकी मृत्यु हो गयी।

जो जैसा बोयेगा वह वैसा ही पायेगा इदी ने न जाने कितने जुल्म किये लोगो को मार डाला, प्रताड़ित किया, मानव का मांस खाया, जमीन में दफ़नाया और न जाने कितने तरीको से लोगो को मरवा दिया, लेकिन उसने जैसा सबके साथ किया वैसा ही उसके साथ हुआ अंतिम समय के 10 से 12 साल वह सुख नही भोग सका इधर उधर भागता रहा और अंत मे दर्दनाक मौत मरा।

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